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दीक्षान्त समारोह फोटो

 
घर को पिरामिड द्वारा ऊर्जामय बनाना 
 कमरे को ऊर्जामय बनाने हेतु :- कमरे के अंदर के वास्तु दोष को दूर कर उसे ऊर्जामय बनाने हेतु निम्न तरीके से पिरामिड लगाएं।

मुख्य द्वार को ऊर्जित करना:- पहले मुख्य द्वार को शुभ-लाभ, घोड़े की नाल या प्रवेश द्वार पर रंगोली आदि से ऊर्जित किया जाता था। परंतु आज के युग में हम अपनी समस्या के लिए शीघ्र क्रियाशील हल चाहते हैं। चित्र मंे दर्शाये अनुसार एक द्वार के ऊपर और दोनों तरफ एक-एक पिरामिड यंत्र लगाएं। यह सबसे अच्छी स्थिति है, पर यदि आपके द्वार के ऊपर या दोनों तरफ इसे लगाने के लिए जगह नहीं है, तो आप इन्हें सीलिंग या बाजू की दीवार पर भी लगा सकते हैं।
घर के मुख्य द्वार को ऊर्जित करने का एक अन्य तरीका भी है। अनुसंधानों से प्राप्त परिणामों के अनुसार एक फेंगशुई दर्पण और पिरामिड दोनों ही द्वार को नकारत्मक ऊर्जा से बचाने में बहुत ही उपयोगी है। इसका उपयोग करने के लिए दरबाजे के मध्य में फेंगशुई दर्पण (पाकुआ) लगाएं दरबाजे के दोनों तरफ पिरामिड यंत्र लगाएं। इस प्रकार से द्वार को ऊर्जित करके नकारत्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोका जा सकता है। क्योंकि दर्पण के प्रभाव से नकारत्मक ऊर्जा परिवर्तित हो जाती है। अर्थात् वापस चली जाती है। साथ ही पिरामिड यंत्र की ऊर्जा भी प्राप्त होती है।

दक्षिणाभिमुक होकर रसोई बनाना :- रसोई घर की सही स्थिति दक्षिण-पूर्व होती है। वास्तु में दक्षिण-पूर्व में ही रसोई का सही स्थान माना गया है क्योंकि दक्षिण-पूर्व में अग्नि का वास माना गया है। रसोई घर में खाना पकाने वाले का मुख पूर्व में होना चाहिए। यदि दक्षिण-पूर्व की ओर मुख करके खाना बनाया जाय, तो यह वास्तु के अनुकूल नहीं है। इससे कई प्रकार की स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां उत्पन्न होती हैं। इसलिए इस प्रकार के दोष का निवारण अत्यंत आवश्यक है। रसोई घर की इस स्थिति में चित्र में अनुसार पिरामिड यंत्र लगायें या एनर्जी 9x9 की प्लेट लगाएं।

रसोईघर में आग और पानी एक सीध में न रखें :- आग और पानी दोनों ही एक-दूसरे के विरोधी तत्व हैं। आग और पानी एक ही प्लेटफार्म पर रहना परिवार में कलह व मतभेद उत्पन्न करता है। परिवार में आपसी मनमुटाव का वातावरण निर्मित हो जाता है। यह दोष भी वास्तुदोषों में मुख्य दोष है। इसके निवारण के लिए वाश-बेसिन को दूसरी साइड हटाकर लगवा दें, यदि यह नहीं कर सकते, तो छत (सीलिंग) पर पायरा स्ट्रिप लगाकर इसे अलग कर दें।
Pooja/Tantra           पूजा / तंत्र

    आपकी वर्तमान एंव भविष्य की परेशानियों एंव कष्टों को दूर करने हेतु मंत्र तंत्र, अनुष्ठान एंव यज्ञ का प्रावधान है जिससे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एंव शिक्षा आदि परेशानियों को दूर किया जा सकता है।

विवाह तंत्र घट विवाह अनुष्ठान अनुकूल रत्न
 
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    सिद्ध यंत्र, सिद्ध लाकेट, सिद्ध रुद्राक्ष एंव सिद्ध मालायें धारण करने एंव मंत्रों के जाप से पति-पत्नि बशीकरण, मुकदद्मा जीतने, शिक्षा एंव नौकरी की रूकावटों, शारीरिक, मानसिक परेशानी दूर की जा सकती है।

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    हम अपनी ज्योतिष, तंत्र शिक्षा प्रसार समिति द्वारा ज्योतिषशास्त्र, वास्तुशास्त्र एवं अंकविज्ञान आदि की शिक्षा प्रदान करते है। यह संस्था अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ, नई दिल्ली से सम्बद्ध (affilated) है।

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पत्रिका कलेण्डर पंचांग लेख

 
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