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किसी बीमार इकाई को फिर से क्रियाशील करना
     किसी बीमार इकाई को फिर से क्रियाशील करना:- अनेकों वास्तु दोषों के कारण औद्योगिक व्यवसायों में भी कठिनाईका सामना करना पड़ता है। कभी-कभी कुछ दोष ऐसे होते हैं जिनके कारण व्यवसाय के बंद होने की नौबत आ जाती है। इस प्रकार के दोषों के निवारण के लिए भी पायरा वास्तु अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है।
     पायरा वास्तु अपनाकर बीमार या बंद होने वाले व्यवसायों को पुनः क्रियाशील करने पर अत्यंत आश्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं। क्योंकि इससे भूखंड और भवन दोनों को ही अधीक ऊर्जाएं मिलती हैं।
     इसका उपाय यह है कि भूखंड को सभी आठ दिशाओं में पिरामिड यंत्रों की सहायता से ऊर्जित करें साथ ही भवन का ऊर्जित करने के लिए उसके ब्रह्मस्थल को क्रियाशील बनाने की पद्धति के अनुसार वहां 9 या 81 पिरामिड यंत्र लगाएं। इस प्रकार से ऊर्जित करने पर किसी भी प्रकार के हानिकारक दुष्परिणामों से बचा जा सकता है। इस प्रकार से बीमार इकाई भी क्रियाशील होकर सक्रिय हो जाती है और जल्दी ही इसके परिणाम भी मिलने लगते हैं।
 

     तिरछे भूखंड हेतु पायरा वास्तु :- पृथ्वी के चुम्बकीय धु्रव से हटे भूखंड के उनचार के लिए भ यह पायरा वास्तु अत्यंत उपयोगी है। इस प्रकार के भूखंड में सभी दिशाएं अपने मुख्य कोणों से हटकर होती हैं। इस प्रकार के भूखंड के लिए 9 मल्टियर या एक मॅक्स स्थापित करें। बेहतर पीरणामों के लिए इसके केंद्र में भी यंत्रों की स्थापना करें। यह उपचार विधि घड़ी की सुई की दिशा के अनुरूप है। इसे इसकी उल्टी दिशा में तथा निर्माण के साथ भी किया जा सकता है या फिर निर्माण के पश्चात् भी किया जा सकता है। 

     कटे कोने के लिए पायरा वास्तु :- कटे हुए कोने के कमरे या भूखंड अच्छे नहीं होते। वास्तु में इस प्रकार के भूखंडों को दोषपूर्ण माना गया है। वास्तु के अनुसार- विशेषरूप से उत्तर-पूर्व का कोना कटा हुआ नहीं होना चाहिए। यदि इस प्रकार के वास्तु को परिवर्तित करना आपके लिए सामथ्र्यपूर्ण नहीं है, तो पायरा वास्तु के अनुसार इस प्रकार के दोष को सुधारा जा सकता है। यदि भूखंड के कटे हुए कोने पर पिरामिड की एक दीवार के कोने में लगाएं। इस प्रकार पिरामिड के प्रयोग से इस प्रकार के दोष का निवारण किया जा सकता है।

     अग्निकोण में जल संग्रह होने पर :- अग्निकोण में जल संग्रह होने से कई प्रकार की परेशानियां उत्पन्न होती हैं। क्योंकि श्ह वास्तु में अग्नि स्थान माना गया है। इस स्थान पर जलतत्व होने से अग्नि तत्व समाप्त हो जाता है। अग्नि और जल एक दूसरे के विरोधी तत्व हैं। इस प्रकार से यह एक बड़ा दोष माने जाता है। इस दोष को दूर करने के लिए जल संग्रह की दिशा में 9 पिरामिड से पिरामिड दीवार बनायें। एक पिरामिड कोने में और 4-4 दोनों दिशाओं में लगाएं।
 
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    आपकी वर्तमान एंव भविष्य की परेशानियों एंव कष्टों को दूर करने हेतु मंत्र तंत्र, अनुष्ठान एंव यज्ञ का प्रावधान है जिससे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एंव शिक्षा आदि परेशानियों को दूर किया जा सकता है।

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    सिद्ध यंत्र, सिद्ध लाकेट, सिद्ध रुद्राक्ष एंव सिद्ध मालायें धारण करने एंव मंत्रों के जाप से पति-पत्नि बशीकरण, मुकदद्मा जीतने, शिक्षा एंव नौकरी की रूकावटों, शारीरिक, मानसिक परेशानी दूर की जा सकती है।

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