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दीक्षान्त समारोह फोटो

 
दक्षिण-पश्चिम में बालकनी
     दक्षिण-पश्चिम में बालकनी :- वास्तु के अनुसार छत या खुली बालकनी का उत्तर-पूर्व दिशा में होना अति उत्तम होता है। उत्तर-पूर्व कोने वाली (ईशान) दिशा में बालकनी व खुली छत की स्थिति सर्वोतम रहती है। यदि बालकनी दक्षिण या पश्चिम में है तो स्थापित क्षेत्र की भीतरी दीवार पर वायरा स्ट्रिप लगाकर उसे अलग कर सकते हैं। पिरामिड यंत्र लगाना हो तो चिपके वाले टेप या पीतल के स्क्रू से कस सकते हैं। अगर बालकनी की जगह अधिक बड़ी हो, तो ज्यादा पायरा स्ट्रिप 3 के गुणांक में दोनों ओर लगा सकते हैं। इस प्रकार से दक्षिण-पश्चिम की खुली बालकनी को गुणात्मक रूप ये हटाकर उत्तर-पूर्व में शिफ्ट किया जा सकता है।
     इस प्रकार से अनेकों वास्तु दोषों का निवारण बिना तोड़-फोड़ के पिरामिड वास्तु के द्वारा किया जा सकता है। आज के आधुनिक युग में अनेकों अनुसंधान व प्रयोगों के द्वारा सभी पिरामिड की ऊर्जा शक्ति की ओर आकर्षित हुये हैं। यह एक अति आधुनिक रूप में पिरामिड शक्ति का प्रयोग है, जोकि वैज्ञानिकों के द्वारा मानव कल्याण के लिए किया गया अत्यधिक प्रभावकारी कार्य है। पिरामिड का ऊर्जा विज्ञान अनेकों कार्यों के लिए लाभप्रद सिद्ध हुआ है।

     इस पिरामिडाकृति को मानव कल्याण के लिए प्रयुक्त करने में हमारे ऋषि-मुनियों का ही हाथ है पिरामिडाकृति को सर्वप्रथम यंत्र रूप प्रदान करने वाले भारतीय हैं। आज इस प्रकार के ज्ञान को पाकर हम यह कह सकते हैं कि पिरामिड द्वारा जीवन की हर समस्याएं सरलतापूर्वक सुलझाई जा सकती हैं। पिरामिड के उपयोग से वास्तुदोष, दरिद्रता एवं अशांति का निवारण करके सुखी व सम्पन्न रह सकते हैं।
     दैनिक जीवन में भी पिरामिड के प्रयोग प्रत्येक क्षेत्र में आश्चर्यजनक हैं। कोई भी प्रणाली या पद्धति को अपनाने के लिए उस विषय में सम्पूर्ण जानकारी होना आवश्यक है तथा महत्वपूर्ण नियम सिद्धांतों का ध्यान रखना आवश्यक है। आधी-अधूरी जानकारी से दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। हर किसी से पुछकर उपायों को अपनाना मुर्खता है। किसी वास्तु विशेषज्ञ की सलाह के बिना, किसी वास्तु निवारण को स्वयं करना कभी-कभी हानिकारक भी हो सकता है। प्रत्येक कार्य में सावधानी आवश्यक है।

     सम्पूर्ण अध्ययन के पश्चात् हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पिरामिड की उपयागिता में दिन-प्रतिदिन वृद्धि हो रही है। आज बहूत से ऐसे परिवार हैं जिन्होंने इस पिरामिड वास्तु के द्वारा अपने भवनों के वास्तुदोषों को दूर किया है। इस पिरामिड वास्तु का अनुभव तो इसे अपनाकर या इस्तेमाल करके ही किया जाता है। पिरामिड न केवल घर में बल्कि समस्त प्रकार के व्यवसायों की उन्नति और समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

     प्राचीन काल से लेकर आज के भौतिकतावादि युग तक पिरामिड पर अनेकों महत्वपूर्ण प्रयोग किये जा चुके हैं। जिससे यह ज्ञात होता है कि पिरामिड में असीमित ऊर्जा, गूढ़ रहस्य व चमत्कारी शक्ति छिपी है। जो नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक में बदलकर वातावरण को समंजस्यपूर्ण बनाती है। इस शक्ति के द्वारा वास्तु दोषों का निवारण संभव है।
Pooja/Tantra           पूजा / तंत्र

    आपकी वर्तमान एंव भविष्य की परेशानियों एंव कष्टों को दूर करने हेतु मंत्र तंत्र, अनुष्ठान एंव यज्ञ का प्रावधान है जिससे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एंव शिक्षा आदि परेशानियों को दूर किया जा सकता है।

विवाह तंत्र घट विवाह अनुष्ठान अनुकूल रत्न
 
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    सिद्ध यंत्र, सिद्ध लाकेट, सिद्ध रुद्राक्ष एंव सिद्ध मालायें धारण करने एंव मंत्रों के जाप से पति-पत्नि बशीकरण, मुकदद्मा जीतने, शिक्षा एंव नौकरी की रूकावटों, शारीरिक, मानसिक परेशानी दूर की जा सकती है।

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