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Tantrik Pendant/ तांत्रिक लाकेट

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दीक्षान्त समारोह फोटो

 
बढे हुए भूखंड का वास्तु दोष दूर करने का उपाय
      बढ़े हुये भूखंड को ठीक करने के लिए:-  किसी भी भूखंड का दक्षिण-पश्चिम में बढ़ा होना ठीक नहीं माना जाता। वास्तु में इस दोष को अत्यंत गंभीर माना जाता है। यह बीमारी, मरनसिक अशांति व दुर्घटना का कारक होता है। साथ ही भूत-प्रेत का भय व आत्महत्या जैसे प्रवृत्तियां भी देखने को मिलती हैं। इस प्रकार के दोष के निराकरण के लिए पिरामिड की दीवार बनाकर भूखंड के नीचे लगाना चाहिए ताकि भूखंड आयताकार बन जाये। इन पिरामिडों की एक से दूरी अधिक तीन फुट रखें। अधिक शक्ति व ऊर्जा के लिए यह दूरी एक फुट की रखें। यह दीवार 9 से मल्टीपल की रहनी चाहिए। जैसे- 9, 18, 27 आदि।

     भूखंड के कोने कटे होने पर:-  किसी भी भूखंड का कटा होना, वास्तु के दृष्टिकोण से अच्छा नहीं माना जाता है। खासकर उत्तर-पूर्व के कोने के कट जाने पर, क्योंकि उत्तर-पूर्व का कोना भवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस कोने के कट जाने पर मानसिक-अशांति, ज्ञान की कमी, धन की कमी, संतान की कमी एवं आध्यात्मिक और बौद्धिक की कमी होती है इसे नीचे दिए गये दो चित्रों के अनुसार पिरामिड लगाकर ठीक किया जा सकता हैl


     ढाल में सुधार :- वास्तु के अनुसार जमीन का ढाल उत्तर-पूर्व की ओर होनी चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि रहती है। यदि यह दोषपूर्ण हो अर्थात् दक्षिण-पश्चिम में नीचा एवं उत्तर-पूर्व में ऊंचा रहे, तो इस दोष के निवारण के लिए चित्रानुसार पिरामिड लगाएं।

टेढ़ी आकृति के कोनों वाले प्लाट के लिए:-  इस तरह आकृति वाले भूखंडों के लिए प्लाट के मध्य को ठीक किया जाता है।
1) नौ पिरामिड के स्थान पर 27 या 81 पिरामिड यंत्रों को लगाएं। 
2) अगर जगह कम हाक ताक इन यंत्रों की स्थापना इस तरह करें, कि यंत्रों को भूमि में रखने व मिट्टी से ढकने के पश्चात् सिर्फ उनके शिखर दिखाई दें। अब उनपर पुनः यंत्र रखें व क्रमशः इसी तरीके को अपनाएं। बेहतर के लिए मॅक्स उपयुक्त होगा क्योंकि यह मल्टियर होगा क्योंकि यह मल्टियर से नौ गुना कम लगेंगे।
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